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JPL के 90 साल: सूखी नदी के तल में हुए रॉकेट परीक्षण से वॉयेजर और मंगल ग्रह तक

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श्वेत-श्याम तस्वीर: रेतीली ज़मीन पर रेत की बोरियों के ऊँचे ढेर के पास तीन आदमी उपकरणों के साथ काम में लगे हैं। गहरे रंग की बिना आस्तीन की जैकेट पहने एक आदमी मोटर के पास खड़ा है; सफ़ेद कमीज़ पहने बाक़ी दो उपकरणों पर झुके हैं। आसपास नलियाँ और धातु के डिब्बे पड़े हैं, साथ में गत्ते का एक डिब्बा भी, जो क्रिस्को (Crisco) वनस्पति घी का है।
अरोयो सेको में कैलटेक की टोली का परीक्षण-स्थल, 1936 या 1937 में ली गई तस्वीर। JPL के वर्णन के अनुसार यहाँ धूल भरी ज़मीन पर लकड़ी के परीक्षण-ढाँचे थे, बिजली के तार खुले पड़े थे और रेत की बोरियों की आड़ बनी थी। ये नलियाँ शायद उच्च दाब वाले सिलेंडरों से अल्कोहल और ऑक्सीजन को मोटर तक पहुँचाती थीं। तस्वीर किस दिन के परीक्षण की है, यह JPL ने नहीं बताया है।NASA/JPL-Caltech (आकार बदला गया) · JPL Image Use Policy

31 अक्टूबर 1936 को कैलटेक के कुछ छात्रों और पासाडेना के रॉकेट-शौक़ीन दो लोगों ने अरोयो सेको में एक छोटी रॉकेट मोटर प्रज्वलित की। अरोयो सेको रोज़ बाउल स्टेडियम के उत्तर में एक सूखी नदी का तल है। नासा की जेट प्रणोदन प्रयोगशाला (JPL) इसी दिन को अपना स्थापना दिवस मानती है।

हैलोवीन (31 अक्टूबर) पर चार कोशिशें

यह समूह फ़्रैंक मलीना की अगुआई में बना। मलीना कैलटेक की वैमानिकी प्रयोगशाला GALCIT में शोध छात्र थे; इस प्रयोगशाला के निदेशक थियोडोर वॉन कार्मन थे। जैक पार्सन्स, जिन्होंने विस्फोटकों के बारे में अपने-आप सीखा था, और कुशल मैकेनिक एड फ़ोरमैन अपने रॉकेट ख़ुद बनाते थे। यही तीनों उस टोली के मुख्य सदस्य थे, जिसे आगे चलकर कैलटेक में “सुसाइड स्क्वॉड” (आत्मघाती दस्ता) कहा जाने लगा। वॉन कार्मन का आग्रह था कि ये लोग सिर्फ़ रॉकेट उड़ाने तक सीमित न रहें, बल्कि मोटर के प्रदर्शन को मापें। इसलिए उन्होंने मापक यंत्रों से लैस एक परीक्षण मोटर बनाई, जिसका बड़ा हिस्सा कबाड़ के पुर्ज़ों से बना था। इस मोटर में ऑक्सीजन के साथ मिथाइल अल्कोहल जलाया जाता था।

वे अरोयो सेको इसलिए गए, क्योंकि कैलटेक अपने परिसर में आग और धमाके नहीं चाहता था। तीन बार बारूद का पलीता बुझ गया और मोटर प्रज्वलित नहीं हो पाई। चौथी कोशिश में मोटर प्रज्वलित हो गई — और ऑक्सीजन की नली में भी आग लग गई। जलती हुई नली बेक़ाबू होकर ज़मीन पर इधर-उधर छटपटाने लगी और टीम के लोग भाग खड़े हुए। रेत की बोरियों की आड़ ने उन्हें बचा लिया; किसी को चोट नहीं आई। JPL के विवरण के अनुसार मोटर लगभग तीन सेकंड चली; मोटर के धक्के (प्रणोद) का कोई माप दर्ज नहीं हुआ। पलीते की जगह स्पार्क प्लग लगाकर टीम ने 15 नवंबर को प्रणोद के पहले माप लिए।

अमेरिकी सेना के रॉकेटों से नासा की प्रयोगशाला तक

1939 में इस काम को एक प्रायोजक मिला: अमेरिकी सेना की वायु कोर (आर्मी एयर कोर) के प्रमुख के अनुरोध पर नेशनल एकेडमी ऑफ़ साइंसेज़ की एक समिति ने ऐसे रॉकेटों पर काम के लिए धन दिया, जो विमानों को छोटी हवाई पट्टियों से उड़ान भरने में मदद करें। 1943 में टीम ने अमेरिकी सेना को जर्मनी की वी-2 मिसाइल के जवाब में अमेरिकी मिसाइल बनाने का एक प्रस्ताव भेजा, और उसी प्रस्ताव में पहली बार अपने लिए Jet Propulsion Laboratory (जेट प्रणोदन प्रयोगशाला) नाम का इस्तेमाल किया।

तो JPL की शुरुआत आख़िर कब हुई? 1936 में न कोई प्रयोगशाला थी, न कोई नाम — बस छात्रों की एक परियोजना थी। यह नाम पहली बार 1943 में सामने आया और जून 1944 में इसे आधिकारिक दर्जा मिला, जब धन देने की ज़िम्मेदारी अमेरिकी सेना की आयुध कोर (ऑर्डनेंस कोर) ने सँभाल ली। JPL ख़ुद अपनी उम्र पहले परीक्षण से गिनती है।

1936 से 2026 तक की एक खड़ी समय-रेखा, जिसमें घटनाओं के बीच की दूरी असली समय-अंतर के अनुपात में है। दिसंबर 1958 में JPL के नासा में शामिल होने से पहले रेखा सुनहरी है और उसके बाद फ़िरोज़ी। बिंदु इन घटनाओं को दिखाते हैं: 1936 का पहला रॉकेट परीक्षण, 1943 में नाम मिलना, एक्सप्लोरर 1, शुक्र ग्रह के पास मेरिनर 2, वॉयेजर यानों के प्रमोचन, मंगल ग्रह पर सोजॉर्नर, इन्जेनुइटी की पहली उड़ान, यूरोपा क्लिपर का प्रमोचन और अभी आगे होने वाला वॉयेजर 1 का पृथ्वी से एक प्रकाश दिन की दूरी पर पहुँचना।
JPL के पहले 90 सालों के नौ पड़ाव, जिन्हें रेखा पर समय के सही अनुपात में रखा गया है। जहाँ घटनाएँ पास-पास हैं, वहाँ लेबल एक-दूसरे से दूर खिसकाए गए हैं और हर लेबल एक पतली रेखा के ज़रिये अपने बिंदु से जुड़ा है।चित्र: SkyFlux · तारीख़ें: नासा और JPL

1 फ़रवरी 1958 को 03:48 UTC पर (अमेरिका में तब 31 जनवरी की रात ही थी) अमेरिकी सेना के जुपिटर-सी रॉकेट से एक्सप्लोरर 1 का प्रमोचन हुआ। यह अमेरिका का पहला उपग्रह था, और इसका डिज़ाइन, निर्माण और संचालन JPL ने किया था। इस पर जेम्स वैन एलन का कॉस्मिक किरण संसूचक लगा था, जिसने उम्मीद से कम कण गिने। वैन एलन ने इसे इस बात का संकेत माना कि पृथ्वी के चारों ओर फँसा विकिरण इतनी अधिक मात्रा में था कि यंत्र उसकी सही गिनती नहीं कर पा रहा था। दो महीने बाद प्रमोचित एक उपग्रह ने उन विकिरण पट्टियों की पुष्टि की, जिन्हें आज वैन एलन पट्टियाँ कहा जाता है। 3 दिसंबर 1958 को JPL सेना से हटकर नई असैनिक एजेंसी नासा के अधीन आ गई। आज भी कैलटेक ही नासा के लिए JPL को चलाता है।

सबसे आगे रहने वाली प्रयोगशाला

14 दिसंबर 1962 को मेरिनर 2 शुक्र ग्रह के पास से गुज़रा। वह किसी दूसरे ग्रह के पास से गुज़रकर आँकड़े पृथ्वी पर भेजने वाला पहला अंतरिक्ष यान था। अगस्त 1977 में प्रमोचित वॉयेजर 2 चारों विशाल ग्रहों तक पहुँचने वाला पहला अंतरिक्ष यान बना; उसकी ग्रह-यात्रा 1989 में वरुण ग्रह के पास पूरी हुई। 25 अगस्त 2012 को उसका जुड़वाँ यान वॉयेजर 1 हीलियोस्फ़ीयर से बाहर निकलने वाला पहला अंतरिक्ष यान बना। हीलियोस्फ़ीयर वह बुलबुला है, जिसे सौर पवन सूर्य और उसके ग्रहों के चारों ओर फुलाए रखता है।

मार्स पाथफ़ाइंडर 4 जुलाई 1997 को मंगल ग्रह पर उतरा और उसने सोजॉर्नर को सतह पर उतारा, जो मंगल ग्रह पर चलने वाला पहला रोवर बना। 2021 में इन्जेनुइटी हेलीकॉप्टर ने किसी दूसरे ग्रह पर पहली बार मोटर से संचालित, नियंत्रित उड़ान भरी और कुल 72 बार उड़ा। 14 अक्टूबर 2024 को प्रमोचित यूरोपा क्लिपर को अप्रैल 2030 में बृहस्पति ग्रह तक पहुँचना है, जहाँ वह इस ग्रह के चंद्रमा यूरोपा का अध्ययन करेगा। माना जाता है कि यूरोपा की बर्फ़ के नीचे खारे पानी का एक महासागर छिपा है।

आगे क्या?

18 नवंबर 2026 को वॉयेजर 1 के पृथ्वी से एक प्रकाश दिन की दूरी, यानी लगभग 26 अरब किलोमीटर, तक पहुँचने की उम्मीद है: उस दिन पृथ्वी से भेजे गए किसी आदेश को यान तक पहुँचने में 24 घंटे लगेंगे। कोई भी प्रकाशीय दूरबीन इस यान को नहीं देख सकती; उससे संपर्क सिर्फ़ नासा के डीप स्पेस नेटवर्क (गहन अंतरिक्ष नेटवर्क) के बड़े-बड़े एंटीना के ज़रिये होता है। JPL ने यह नेटवर्क 1958 में बनाना शुरू किया था और 1963 में इसे औपचारिक रूप से स्थापित किया।

JPL की आगे की योजनाओं में ये शामिल हैं: स्काईफ़ॉल, जिसका प्रमोचन 2028 में करने का लक्ष्य है और जो मंगल ग्रह पर उतरने के दौरान तीन हेलीकॉप्टर छोड़ेगा, ताकि वे ज़मीन के नीचे दबी बर्फ़ का नक़्शा बना सकें; मूनफ़ॉल, यानी रॉकेट से चलने वाले ड्रोन, जो चंद्रमा के दक्षिणी ध्रुव के पास उतरेंगे; सनराइज़ (SunRISE), यानी छह छोटे उपग्रह, जिनका प्रमोचन 2027 में होना है और जो सूर्य का अध्ययन करने के लिए आपसी तालमेल से उड़ते हुए मिलकर एक रेडियो एंटीना का काम करेंगे; और NEO सर्वेयर, क्षुद्रग्रहों की खोज करने वाली एक अंतरिक्ष दूरबीन।

यह वर्षगाँठ मुश्किल समय में आई है: 2024 में छँटनी के दो दौर के बाद, अक्टूबर 2025 में JPL ने बजट के दबाव का हवाला देकर लगभग 550 और नौकरियाँ ख़त्म कर दीं।

स्रोत और लाइसेंस

  • नासा, नवाचार और अन्वेषण के अगले 90 सालों की ओर JPL (NASA JPL Looks to Next 90 Years of Innovation, Exploration, 21 अक्टूबर 2026) — 31 अक्टूबर 1936 को अरोयो सेको में शुरुआत, नासा के लिए कैलटेक द्वारा JPL का संचालन, 1958 में एक्सप्लोरर 1 और उसी साल JPL का नासा में शामिल होना, चारों विशाल ग्रहों तक पहली पहुँच, मंगल ग्रह पर चलने वाले पहले रोवर, 18 नवंबर को वॉयेजर 1 का एक प्रकाश दिन की दूरी (26 अरब किलोमीटर) पर पहुँचना, और स्काईफ़ॉल, मूनफ़ॉल, सनराइज़ और NEO सर्वेयर। https://www.nasa.gov/centers-and-facilities/jpl/nasa-jpl-looks-to-next-90-years-of-innovation-exploration/
  • JPL, इतिहास (History) — संस्थापक समूह, 1943 का वह प्रस्ताव जिसमें नाम पहली बार आता है, आयुध कोर से मिला धन, आर्मी बैलिस्टिक मिसाइल एजेंसी के साथ एक्सप्लोरर 1, 3 दिसंबर 1958 को JPL का नासा के अधीन आना, और मेरिनर 2 का किसी दूसरे ग्रह के पास से गुज़रकर आँकड़े भेजने वाला पहला यान होना। https://www.jpl.nasa.gov/who-we-are/history/
  • एरिक एम. कॉनवे (JPL के इतिहासकार), रॉकेटों से अंतरिक्ष यानों तक (From Rockets to Spacecraft), Caltech Engineering & Science, अंक 4, 2007 — “सुसाइड स्क्वॉड” नाम, पार्सन्स और फ़ोरमैन, मोटर का प्रदर्शन मापने पर वॉन कार्मन का आग्रह, कबाड़ से बनी परीक्षण मोटर, परीक्षण कैलटेक परिसर से बाहर क्यों हुए, तीन बार बुझा पलीता और जलती ऑक्सीजन नली, पहले दिन प्रणोद का कोई आँकड़ा न मिलना, स्पार्क प्लग और 15 नवंबर को प्रणोद के पहले आँकड़े, 1939 में विमानों को उड़ान भरने में मदद करने वाले रॉकेटों के लिए धन, जिसका अनुरोध आर्मी एयर कोर के प्रमुख ने नेशनल एकेडमी ऑफ़ साइंसेज़ के ज़रिये किया था, और जून 1944 में नाम को आधिकारिक दर्जा मिलना। https://calteches.library.caltech.edu/702/2/Spacecraft.pdf
  • JPL, एक नए युग की चिंगारी (The Spark of a New Era; 2011 के लेख का 2017 में अद्यतन रूप) — पहले परीक्षण में मौजूद सात लोग, रोज़ बाउल से लगभग 5 किलोमीटर (3 मील) उत्तर में स्थित जगह, उच्च दाब वाले सिलेंडरों से पहुँचाए गए अल्कोहल और ऑक्सीजन नोदक, और मोटर का लगभग तीन सेकंड चलना। https://www.jpl.nasa.gov/news/the-spark-of-a-new-era/
  • JPL, इतिहास की एक झलक: रॉकेट मोटर का पहला परीक्षण (Slice of History: The First Rocket Motor Firing, 30 जनवरी 2026) — मुख्य तस्वीर और उसके साथ दिया गया परीक्षण-स्थल का वर्णन। श्रेय: NASA/JPL-Caltech। https://www.jpl.nasa.gov/images/slice-of-history-the-first-rocket-motor-firing/
  • नासा और JPL के मिशन पेज: एक्सप्लोरर 1, मेरिनर 2, वॉयेजर 1, वॉयेजर 2, मार्स पाथफाइंडर, इन्जेनुइटी, यूरोपा क्लिपर — प्रमोचन, पास से गुज़रने, उतरने और उड़ानों की तारीख़ें, एक्सप्लोरर 1 के प्रमोचन का समय और उसके संसूचक ने विकिरण पट्टियों का पता कैसे लगाया, 25 अगस्त 2012 को वॉयेजर 1 का हीलियोस्फ़ीयर से बाहर निकलना, इन्जेनुइटी की 72 उड़ानें, और यह कि वॉयेजर 1 का संकेत रेडियो दूरबीनों ने पकड़ा है, प्रकाशीय दूरबीनों ने नहीं (PIA17047)। https://www.jpl.nasa.gov/missions/explorer-1/ https://www.jpl.nasa.gov/images/pia17047-voyager-signal-spotted-by-earth-radio-telescopes/ https://science.nasa.gov/mission/explorer-1/ https://science.nasa.gov/mission/mariner-2/ https://science.nasa.gov/mission/voyager/voyager-1/ https://science.nasa.gov/mission/voyager/voyager-2/ https://science.nasa.gov/mission/mars-pathfinder/ https://science.nasa.gov/mission/mars-2020-perseverance/ingenuity-mars-helicopter/ https://science.nasa.gov/mission/europa-clipper/
  • कैलटेक, JPL में नौकरियों में कटौती पर परिसर-सूचना (14 अक्टूबर 2025); NBC लॉस एंजेलिस (6 फ़रवरी 2024); ABC7 (13 नवंबर 2024) — अक्टूबर 2025 में लगभग 550 नौकरियों में कटौती और उसके लिए बताया गया बजट का कारण (कैलटेक), और 2024 में छँटनी के दो दौर: फ़रवरी में 530 कर्मचारी (NBC LA) और नवंबर में लगभग 325, निदेशक लॉरी लेशिन के आंतरिक संदेश के अनुसार (ABC7)। https://hr.caltech.edu/campus-announcements/78146 https://www.nbclosangeles.com/news/local/jpl-plans-to-lay-off-hundreds-of-employees-due-to-lack-of-funding/3332447/ https://abc7.com/post/jpl-pasadena-lay-off-325-employees-5-workforce-amid-budget-cuts/15542972/
  • Physics Today, डीप स्पेस नेटवर्क के 50 साल (The Deep Space Network at 50, दिसंबर 2014) — डीप स्पेस नेटवर्क की शुरुआत: 1958 में गोल्डस्टोन में JPL का एक एंटीना नासा को सौंपा गया, और 24 दिसंबर 1963 को JPL के निदेशक विलियम पिकरिंग ने नेटवर्क को औपचारिक रूप से स्थापित किया। https://physicstoday.aip.org/features/the-deep-space-network-at-50

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