SkyFlux

ग्रह

बेपिकोलंबो: 21 नवंबर को बुध ग्रह की कक्षा में प्रवेश की योजना

प्रकाशित · अपडेट:

चित्र: बाईं ओर धूसर रंग का बुध ग्रह; उसके चारों ओर एमपीओ की छोटी फ़िरोज़ी कक्षा और मियो का लंबा नीला दीर्घवृत्त, जो दूर दाईं ओर तक फैला है। नीचे की समय-रेखा पर 2018 का प्रमोचन, यान का एक बार पृथ्वी के और दो बार शुक्र ग्रह के पास से गुज़रना, छह बार बुध के पास से गुज़रना, और 21 नवंबर 2026 को कक्षा में प्रवेश दिखाए गए हैं।
चित्र में बुध ग्रह के चारों ओर बेपिकोलंबो के दोनों कक्षीय यानों की कक्षाएँ सही पैमाने पर दिखाई गई हैं: ईएसए का एमपीओ सतह से 480 से 1,500 किलोमीटर ऊपर उड़ेगा, जाक्सा का मियो 590 से 11,640 किलोमीटर ऊपर। दोनों कक्षाएँ ध्रुवों के ऊपर से गुज़रती हैं; अंतरिक्ष में वे किस दिशा में हैं, यह चित्र में सिर्फ़ सांकेतिक है, सटीक नहीं। नीचे की समय-रेखा पर वे नौ मौक़े दिखाए गए हैं, जब ग्रहों के पास से गुज़रकर यान की रफ़्तार घटी। कक्षाओं के आँकड़े और तारीख़ें ईएसए से ली गई हैं, जिसका कहना है कि तारीख़ें बदल सकती हैं।SkyFlux · ESA, NASA NSSDC

ईएसए की योजना के अनुसार यूरोप और जापान का साझा अंतरिक्ष यान बेपिकोलंबो 21 नवंबर को बुध ग्रह की कक्षा में प्रवेश करने वाला है (समय अभी घोषित नहीं हुआ है)। यह सफ़र अक्टूबर 2018 में शुरू हुआ था, और रास्ते में यान को नौ बार ग्रहों के पास से गुज़रना पड़ा। वजह यह नहीं कि बुध बहुत दूर है, बल्कि यह कि सूर्य की ओर गिरता हुआ यान इतनी ज़्यादा रफ़्तार से पहुँचता है कि बुध का गुरुत्वाकर्षण उसे पकड़ नहीं पाता।

21 नवंबर को और उसके बाद क्या होगा

बेपिकोलंबो में अब दो अंतरिक्ष यान हैं, जो आपस में जुड़कर एक साथ सफ़र कर रहे हैं: ईएसए का मर्करी प्लैनेटरी ऑर्बिटर (एमपीओ) और जाक्सा का मर्करी मैग्नेटोस्फ़ेरिक ऑर्बिटर, जिसे मियो कहा जाता है। एक तीसरा यान, मर्करी ट्रांसफ़र मॉड्यूल (यानी परिवहन मॉड्यूल), इन दोनों को साथ लेकर चलता रहा, और जून के मध्य तक उसी के आयन इंजन इन्हें आगे धकेलते रहे। 3 सितंबर को उसे अलग कर दिया गया, और तब से इस जोड़ी को एमपीओ के अपने प्रणोदित्र (थ्रस्टर) दिशा दे रहे हैं।

21 नवंबर को अब भी आपस में जुड़े ये दोनों यान एक ध्रुवीय कक्षा में प्रवेश करने वाले हैं, जो दोनों ध्रुवों के ऊपर से गुज़रती है। इसलिए जैसे-जैसे बुध अपनी धुरी पर घूमेगा, उसकी पूरी सतह बारी-बारी से यानों के नीचे से गुज़रेगी। ईएसए की प्रकाशित समय-सारणी के अनुसार इसके बाद का क्रम यह है:

  • 9–10 दिसंबर: एमपीओ मियो को उसकी अपनी कक्षा में छोड़ेगा।
  • 16 दिसंबर: एमपीओ उस कवच को अलग कर देगा, जो मियो को धूप से बचाता रहा है, और अपनी कक्षा की ओर नीचे उतरना शुरू करेगा।
  • 10 मार्च 2027: एमपीओ अपनी अंतिम कक्षा में पहुँचेगा।
  • अप्रैल 2027: वैज्ञानिक काम शुरू होगा।

यह तारीख़ कितनी पक्की है? 6 अक्टूबर 2026 की अपनी ताज़ा जानकारी में ईएसए अब भी 21 नवंबर ही बताता है, पर उसकी समय-सारणी में यह भी लिखा है कि संचालन से जुड़े कारणों से सटीक तारीख़ें बदल सकती हैं। यह तारीख़ पहले भी बदल चुकी है: अप्रैल 2024 में बिजली-तंत्र की एक ख़राबी के कारण आयन इंजन पूरा प्रणोद नहीं दे पाए, और दिसंबर 2025 के लिए तय कक्षा-प्रवेश नवंबर 2026 तक टल गया। ईएसए के कुछ वेब पन्नों पर बुध तक पहुँचने का समय दिसंबर 2026 लिखा है — शायद इसलिए कि वे पन्ने 9–10 दिसंबर को ही आगमन मानते हैं, जब दोनों कक्षीय यान अलग-अलग अंतरिक्ष यानों की तरह उड़ने लगेंगे।

दो कक्षीय यान, दो काम

एमपीओ सतह से 480 से 1,500 किलोमीटर की ऊँचाई पर हर 2.3 घंटे में ग्रह का एक चक्कर लगाएगा। उसके ग्यारह यंत्रों में से ज़्यादातर ख़ुद ग्रह का अध्ययन करेंगे: एक लेज़र तुंगतामापी सतह की ऊँचाई-निचाई का नक़्शा बनाएगा, एक्स किरण और गामा किरण स्पेक्ट्रोमीटर सतह का रासायनिक संघटन मापेंगे, और रेडियो अनुवर्तन से — यानी रेडियो संकेतों के सहारे यान की गति को बारीकी से मापकर — गुरुत्वाकर्षण क्षेत्र का नक़्शा बनेगा, जिससे ग्रह के क्रोड के आकार और उसकी अवस्था का पता चलेगा।

मियो एक लंबी, दीर्घवृत्ताकार कक्षा में चलेगा — सतह से 590 से 11,640 किलोमीटर ऊपर — और हर 9.3 घंटे में एक चक्कर पूरा करेगा। उसके पाँच यंत्र बुध के चुंबकीय क्षेत्र को, उसमें फँसे आवेशित कणों को, ग्रह के विरल बहिर्मंडल को (उसमें मौजूद सोडियम समेत) और बुध की कक्षा के आसपास फैली धूल को मापेंगे।

ईएसए जिन सवालों के जवाब ढूँढ़ रहा है, उनमें ये भी हैं: इतने छोटे ग्रह के पास अब भी चुंबकीय क्षेत्र क्यों है, सूर्य के इतने क़रीब होने के बावजूद उसके ध्रुवों के आसपास के क्रेटरों में बर्फ़ क्यों है, और सतह की वे आकृतियाँ कैसे बनीं, जिन्हें गर्त कहा जाता है। बेपिकोलंबो बुध की परिक्रमा करने वाला दूसरा मिशन होगा — पहला था नासा का मेसेंजर (2011–2015) — और वहाँ दो कक्षीय यान पहुँचाने वाला पहला।

आठ साल क्यों लगे

बुध पृथ्वी से कभी लगभग 22 करोड़ किलोमीटर से ज़्यादा दूर नहीं होता, फिर भी वहाँ पहुँचने के लिए बेपिकोलंबो ने 9.9 अरब किलोमीटर का सफ़र तय किया है। मुश्किल दूरी की नहीं, रफ़्तार की है। सूर्य की ओर गिरता अंतरिक्ष यान पूरे रास्ते रफ़्तार पकड़ता जाता है: अगर कोई यान पृथ्वी की कक्षा से सबसे किफ़ायती रास्ते पर, बिना इंजन चलाए, सूर्य की ओर गिरता जाए, तो बुध की दूरी तक पहुँचते-पहुँचते उसकी रफ़्तार लगभग 57 किलोमीटर प्रति सेकंड हो जाएगी — उस जगह ख़ुद ग्रह की रफ़्तार से क़रीब 10 किलोमीटर प्रति सेकंड ज़्यादा। बुध का गुरुत्वाकर्षण कमज़ोर है (उसका पलायन वेग 4.3 किलोमीटर प्रति सेकंड है), इसलिए उसकी पकड़ में आने के लिए यान को लगभग ग्रह जितनी ही रफ़्तार से और लगभग उसी दिशा में चलते हुए उसके पास पहुँचना होता है।

यही वजह है कि बेपिकोलंबो ने आठ साल यह अतिरिक्त रफ़्तार घटाने में लगाए। उसके आयन इंजन कई-कई हफ़्तों तक लगातार हल्का धक्का देते रहे, और नौ बार ग्रहों के पास से गुज़रने पर उसकी रफ़्तार और दिशा बदली: एक बार पृथ्वी (अप्रैल 2020), दो बार शुक्र ग्रह (अक्टूबर 2020 और अगस्त 2021) और छह बार बुध (अक्टूबर 2021 से जनवरी 2025 तक)। हर बार सूर्य के चारों ओर यान की कक्षा बुध की अपनी कक्षा के कुछ और क़रीब आई, और आख़िरकार इतनी क़रीब आ गई कि ग्रह उसे पकड़ सके।

उसी हफ़्ते आकाश में बुध ग्रह

उसी समय, 20 नवंबर की देर रात (UTC), बुध ग्रह सूर्य के पश्चिम में उससे अपनी सबसे बड़ी कोणीय दूरी पर पहुँचेगा। इसलिए कक्षा-प्रवेश के आसपास की सुबहों में उत्तरी गोलार्ध से इस ग्रह को देखने का अच्छा मौक़ा मिलेगा: नई दिल्ली से भोर में, जब सूर्य क्षितिज से 6° नीचे होगा और नागरिक संधि काल शुरू होगा, बुध पूर्व-दक्षिण-पूर्वी क्षितिज से लगभग 13° ऊपर होगा। हमारा लेख “सुबह के आकाश में बुध ग्रह: सूर्योदय से पहले शुक्र की मदद से उसे ढूँढ़ें” बताता है कि कहाँ देखें। लगभग 34° दक्षिणी अक्षांश (सिडनी या केप टाउन) से, नागरिक संधि काल की शुरुआत के उसी समय, बुध सिर्फ़ लगभग 4° ऊपर होगा, और उसे देख पाना मुश्किल होगा।

यान ख़ुद दिखाई नहीं देगा। लगभग दस मीटर चौड़ा यान, जो 15 करोड़ किलोमीटर दूर हो और आकाश में सूर्य से सिर्फ़ लगभग 20° हटकर हो, किसी भी दूरबीन की पहुँच से बहुत बाहर है।

स्रोत और लाइसेंस

  • ईएसए, बुध पर बेपिकोलंबो के पहुँचने की ताज़ा जानकारी (Latest updates: BepiColombo's arrival at Mercury, 6 अक्टूबर 2026) — 21 नवंबर 2026 को कक्षा में प्रवेश, 9–10 दिसंबर को मियो का अलग होना, अप्रैल 2027 से वैज्ञानिक चरण, 24 सितंबर को प्रक्षेप पथ में पहला सुधार (11.4 मीटर प्रति सेकंड), यंत्रों की पहली जाँच। https://www.esa.int/Science_Exploration/Space_Science/BepiColombo/Latest_updates_BepiColombo_s_arrival_at_Mercury
  • ईएसए, बुध पर बेपिकोलंबो के पहुँचने की समय-सारणी (BepiColombo arrival at Mercury timeline; जुलाई 2026 में अद्यतन) — पहुँचने का क्रम तारीख़ों सहित (3 सितंबर, 21 नवंबर, 9–10 दिसंबर, 16 दिसंबर 2026; 10 मार्च और 6 अप्रैल 2027), ध्रुवीय कक्षा, और यह टिप्पणी कि संचालन से जुड़े कारणों से सटीक तारीख़ें बदल सकती हैं। https://www.esa.int/ESA_Multimedia/Images/2018/10/BepiColombo_arrival_at_Mercury_timeline
  • ईएसए, परिवहन मॉड्यूल के सफलतापूर्वक अलग होने के साथ बेपिकोलंबो के बुध पहुँचने का क्रम शुरू (BepiColombo begins Mercury arrival with MTM separation success, 7 सितंबर 2026) — 9.9 अरब किलोमीटर का सफ़र, नौ बार ग्रहों के पास से गुज़रना, 15 जून 2026 को आयन इंजन बंद, परिवहन मॉड्यूल के 15 मीटर लंबे दो सौर पैनल, दिसंबर 2026 में बुध की कक्षा में दो कक्षीय यान। https://www.esa.int/Enabling_Support/Operations/BepiColombo_begins_Mercury_arrival_with_MTM_separation_success
  • ईएसए, बेपिकोलंबो का तथ्य-पत्रक और मिशन पेज (BepiColombo factsheet) — ग्रहों के पास से नौ बार गुज़रने की सभी तारीख़ें, 2026–2027 के अहम पड़ाव, बुध पर भेजे गए पहले के मिशन, वैज्ञानिक सवाल (चुंबकीय क्षेत्र, ध्रुवों पर बर्फ़, गर्त)। https://www.esa.int/Science_Exploration/Space_Science/BepiColombo/BepiColombo_factsheet और https://www.esa.int/Science_Exploration/Space_Science/BepiColombo
  • ईएसए, मर्करी प्लैनेटरी ऑर्बिटर और मर्करी मैग्नेटोस्फ़ेरिक ऑर्बिटर (मियो) के पेज — कक्षाएँ (480 × 1,500 किलोमीटर, 2.3 घंटे; 590 × 11,640 किलोमीटर, 9.3 घंटे), एमपीओ का आकार (ढाँचा 2.4 × 2.2 × 1.7 मीटर, सौर पैनल 7.5 मीटर), मियो का घूर्णन, दोनों कक्षीय यानों के यंत्र। https://www.esa.int/Science_Exploration/Space_Science/BepiColombo/Mercury_Planetary_Orbiter और https://www.esa.int/Science_Exploration/Space_Science/BepiColombo/Mercury_Magnetospheric_Orbiter_Mio
  • ईएसए, बुध के पास से चौथी बार गुज़रने के साथ बेपिकोलंबो नए पथ पर (Fourth Mercury flyby begins BepiColombo's new trajectory, 2 सितंबर 2024) — अप्रैल 2024 में प्रणोद की ख़राबी, जिसके कारण दिसंबर 2025 का कक्षा-प्रवेश संभव नहीं रहा, नवंबर 2026 में पहुँचने की नई तारीख़, और यह कि रफ़्तार घटाने के लिए ग्रहों के पास से गुज़रकर उनके गुरुत्वाकर्षण की मदद लेना क्यों ज़रूरी है। https://www.esa.int/Science_Exploration/Space_Science/BepiColombo/Fourth_Mercury_flyby_begins_BepiColombo_s_new_trajectory
  • नासा NSSDC, बुध ग्रह की तथ्य-तालिका (Mercury Fact Sheet) — बुध (47.36 किलोमीटर प्रति सेकंड) और पृथ्वी (29.78 किलोमीटर प्रति सेकंड) की औसत कक्षीय रफ़्तार, बुध का पलायन वेग (4.3 किलोमीटर प्रति सेकंड), त्रिज्या, अर्ध-दीर्घ अक्ष और अपसौर दूरी, पृथ्वी का अर्ध-दीर्घ अक्ष और अपसौर दूरी, https://nssdc.gsfc.nasa.gov/planetary/factsheet/mercuryfact.html ; सूर्य का GM (1,32,712 × 10⁶ किमी³/से²), https://nssdc.gsfc.nasa.gov/planetary/factsheet/sunfact.html से। पृथ्वी की कक्षा से सबसे किफ़ायती (होमान) स्थानांतरण कक्षा पर बुध की दूरी तक पहुँचने की रफ़्तार, 57.5 किलोमीटर प्रति सेकंड, बनाम बुध की औसत दूरी पर वृत्ताकार कक्षा की रफ़्तार, 47.9 किलोमीटर प्रति सेकंड — यह हमारी गणना है।
  • JPL Horizons (नासा/JPL) — 21 नवंबर 2026 को पृथ्वी से बुध की दूरी, सूर्य से बुध की कोणीय दूरी, और लंदन, सिडनी, केप टाउन और नई दिल्ली से भोर में (नागरिक संधि काल की शुरुआत पर) उसका उन्नतांश; 17 अक्टूबर 2026 को परिकलित (नई दिल्ली के लिए 20 अक्टूबर 2026 को)। https://ssd.jpl.nasa.gov/horizons/

इसे अपने यहाँ के आकाश में देखें

और ख़बरें

धूमकेतु यूक्लिड: गैलेक्सियों का नक़्शा बनाने वाली ईएसए की दूरबीन ने अपना पहला धूमकेतु खोजा

गैलेक्सियों का नक़्शा तैयार करने के लिए बनाई गई यूरोपीय अंतरिक्ष एजेंसी (ईएसए) की यूक्लिड अंतरिक्ष दूरबीन ने अपना पहला धूमकेतु खोजा है, जिसे अब C/2026 S1 (Euclid) नाम मिला है। यह पृथ्वी से लगभग 1.3 अरब किलोमीटर दूर है और उस तल से बहुत ऊपर है, जिसमें ग्रह सूर्य की परिक्रमा करते हैं — लगभग सूर्य के ठीक ऊपर। इसकी कक्षा उस तल से 85° झुकी हुई है।

पास से देखने पर कुछ सफ़ेद बौने तारे हरे, गुलाबी या बैंगनी दिखेंगे: नया अध्ययन

सफ़ेद बौने सूर्य जैसे तारों के घने अवशेष हैं, और हम आम तौर पर उन्हें सफ़ेद या हल्के नीले रंग का मानते हैं। वारविक विश्वविद्यालय के मार्क हॉलैंड्स के नेतृत्व में हुए एक अध्ययन में, जो 15 अक्टूबर 2026 को शोध-पत्रिका RAS Techniques and Instruments में प्रकाशित हुआ, यह गणना की गई है कि अगर कोई प्रेक्षक इतने पास हो कि उसे सफ़ेद बौने का बिंब दिखाई दे, तो वह तारा उसे किस रंग का दिखेगा। ज़्यादातर सफ़ेद बौने सचमुच सफ़ेद हैं: सूर्य के सबसे नज़दीकी 152 सफ़ेद बौनों में से मोटे तौर पर हर तीस में से लगभग एक का रंग तपकर चमकते किसी पिंड के रंग से साफ़ अलग है; ये गिने-चुने तारे गुलाबी या पीले दिखते हैं। ख़ास तौर पर चुने गए कुछ दुर्लभ तारों में टीम को एक ऐसा तारा भी मिला, जो साफ़ तौर पर हरा दिखेगा।

MACS J0454.1-0300: वेब की छवि में सुनहरा गैलेक्सी पुंज और उसके गुरुत्वाकर्षण से बने चाप

सितंबर 2026 के लिए चुनी गई वेब की “महीने की तस्वीर” में MACS J0454.1-0300 दिखता है, जो कालपुरुष तारामंडल में स्थित एक गैलेक्सी पुंज है। इसका गुरुत्वाकर्षण अपने पीछे कहीं ज़्यादा दूर स्थित गैलेक्सियों के प्रकाश को मोड़कर उनकी छवियों को बड़ा कर देता है, और उन गैलेक्सियों के भीतर के छोटे चमकीले धब्बे कुछ मामलों में 300 गुना से भी ज़्यादा आवर्धित दिखते हैं।

अल्मा का 13वाँ अवलोकन चक्र शुरू: समय की रिकॉर्ड माँग और नए बैंड 2 अभिग्राही

चिली की अल्मा (ALMA) वेधशाला ने 1 अक्टूबर 2026 को अपना तेरहवाँ अवलोकन चक्र शुरू किया, और इस बार समय की माँग ने रिकॉर्ड तोड़ दिया: खगोलविदों ने उसके मुख्य, 12-मीटर ऐरे पर जितना समय उपलब्ध था, उसका लगभग नौ गुना माँगा। इसी चक्र से बैंड 2 नाम के नए अभिग्राही (रिसीवर) भी पहली बार सामान्य अवलोकनों के लिए उपलब्ध हो गए।