सर्पिल गैलेक्सी M83: अल्मा ने बनाया ठंडी आण्विक गैस का मानचित्र
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चिली की अल्मा (ALMA) वेधशाला की एक नई छवि में सर्पिल गैलेक्सी M83 तारों की रोशनी में नहीं, बल्कि ठंडी गैस की मंद रेडियो चमक में दिखती है। यही गैस नए तारों का कच्चा माल है। इस गैस के मापन बताते हैं कि उसका घनत्व और तापमान युवा तारों पर कम और गैलेक्सी के घूर्णन, केंद्रीय दंड तथा सर्पिल भुजाओं पर ज़्यादा निर्भर करता है।
तारों के कच्चे माल में दिखती गैलेक्सी
M83, जिसे दक्षिणी पिनव्हील भी कहा जाता है, लगभग 1.5 करोड़ प्रकाश वर्ष दूर जलसर्प (हाइड्रा) तारामंडल में है। साधारण तस्वीरों में वह तारों और धूल से बनी एक चमकीली सर्पिल आकृति के रूप में दिखती है। अल्मा, यानी चिली के एंडीज़ पर्वतों में चाजनांतोर पठार पर लगे रेडियो एंटीनाओं का समूह, उसमें कुछ और देखता है: मिलीमीटर तरंगदैर्घ्य वाला वह प्रकाश, जो ठंडे गैस-बादलों के अणु छोड़ते हैं।
ये बादल इसलिए अहम हैं कि लगभग हर तारा ऐसे ही किसी बादल के सिकुड़कर ढहने से बनता है। जब तारे चमकने लगते हैं, तो वे अपने आसपास की गैस को गर्म कर देते हैं, जिससे बाक़ी गैस का ढहना और कठिन हो जाता है; उधर गैलेक्सी का घूर्णन गैस को लगातार मथता रहता है। ये सब प्रभाव मिलकर तय करते हैं कि कोई गैलेक्सी कितनी तेज़ी से नए तारे बनाती है।
इन प्रभावों को परखने के लिए M83 दो कारणों से अच्छा उदाहरण है। वह हमारी अपनी आकाशगंगा से बहुत मिलती-जुलती है, जो ख़ुद भी केंद्रीय दंड वाली सर्पिल गैलेक्सी, यानी दंडीय सर्पिल गैलेक्सी है। और वह हमें लगभग ठीक सामने से दिखती है, इसलिए उसकी भुजाएँ, उसका दंड और भुजाओं के बीच के हिस्से एक-दूसरे को ढके बिना अलग-अलग दिखते हैं।
गैस को तारे नहीं, गैलेक्सी की संरचना आकार देती है
यह छवि जिन कोडा के नेतृत्व में हुए एक अध्ययन से ली गई है, जो 2025 में The Astrophysical Journal में छपा था। ठंडी गैस का पता लगाने के लिए खगोलविद कार्बन मोनोक्साइड (CO) के अणु का सहारा लेते हैं। टीम ने CO का मानचित्र उसकी दो विशिष्ट तरंगदैर्घ्यों पर बनाया, जिन्हें स्पेक्ट्रम रेखाएँ कहते हैं; इस मानचित्र में लगभग 150 प्रकाश वर्ष जितनी छोटी संरचनाएँ भी अलग-अलग पहचानी जा सकती हैं। कम तरंगदैर्घ्य वाली रेखा अणु के ऊँचे ऊर्जा स्तर से आती है, इसलिए वह तभी चमकती है जब गैस ज़्यादा घनी या ज़्यादा गर्म हो। इसी कारण दोनों रेखाओं की चमक का अनुपात बताता है कि गैस कितनी घनी या कितनी गर्म है।
यह अनुपात गैलेक्सी की संरचना के अनुसार जगह-जगह बदलता है। भुजाओं के बीच के हिस्सों में यह कम है, भुजाओं और दंड में बढ़ जाता है, और ठीक केंद्र में सबसे ज़्यादा है। भुजाओं और दंड में इस बढ़त का मतलब है कि वहाँ गैस का घनत्व या तापमान, या दोनों, लगभग दो से तीन गुना ज़्यादा है। यह बढ़त भुजाओं के उन हिस्सों में भी दिखती है जहाँ कोई तारा नहीं बन रहा, इसलिए वहाँ गैस को तारे नहीं, ख़ुद भुजाएँ बदल रही हैं। युवा तारागुच्छों के पास अनुपात और भी बढ़ जाता है, पर यह बढ़त उनके ठीक आसपास तक सीमित रहती है।
लेखकों का निष्कर्ष है कि M83 की चक्रिका में ज़्यादातर गैस की अवस्था गैलेक्सी का घूर्णन, उसका दंड और उसकी भुजाएँ तय करते हैं, और नए तारों से मिलने वाली गर्मी उनके निकट परिवेश तक ही सीमित रहती है। आकाशगंगा और दूसरी दंडीय सर्पिल गैलेक्सियों के पहले के अध्ययन भी ऐसे ही नतीजों पर पहुँचे थे, इसलिए लेखकों का अनुमान है कि ऐसी गैलेक्सियों में यह पैटर्न आम है।
M83 आकाश में कहाँ और कब दिखती है
M83 का विषुवांश 13 घंटे 37 मिनट और दिक्पात −29° 52′ है। इतने दक्षिणी दिक्पात के कारण वह लगभग 60° उत्तरी अक्षांश के उत्तर में स्थित जगहों पर कभी उगती ही नहीं, और यूरोप के ज़्यादातर हिस्सों में दक्षिणी क्षितिज के पास इतनी नीची रहती है कि उसे देख पाना मुश्किल है। नई दिल्ली से वह अपने सबसे ऊँचे बिंदु पर दक्षिणी क्षितिज से लगभग 32° ऊपर तक पहुँचती है, जो देखने के लिए ठीक-ठाक ऊँचाई है। दक्षिणी गोलार्ध से उसे देखना आसान है: लगभग 60° दक्षिणी अक्षांश के दक्षिण में वह कभी अस्त नहीं होती, और लगभग 30° दक्षिणी अक्षांश के आसपास वह सिर के लगभग ठीक ऊपर से गुज़रती है।
अक्टूबर में M83 आकाश में सूर्य के पास है और उसे देखा नहीं जा सकता। साल के आख़िर की ओर वह सुबह के आकाश में लौट आती है। अप्रैल के मध्य में वह सूर्य के ठीक विपरीत, यानी विमुखता में होती है, और तब आधी रात के आसपास सबसे ऊँची होती है। मई से सितंबर तक वह शाम के आकाश में दिखती है।
M83 का कांतिमान लगभग 7.5 है और वह आकाश की सबसे चमकीली सर्पिल गैलेक्सियों में से एक है। जहाँ वह क्षितिज से अच्छी-ख़ासी ऊँचाई तक उठती है, वहाँ से उसे द्विनेत्री दूरबीन से भी देखा जा सकता है, पर सिर्फ़ एक छोटे, मंद, धुँधले धब्बे के रूप में, तस्वीरों वाली सर्पिल आकृति के रूप में नहीं। यूरोप जैसे उत्तरी मध्य अक्षांशों से उसे दूरबीन से देखना भी मुश्किल है: 1781 में पेरिस से उसे देखने वाले चार्ल्स मेसियर ने लिखा था कि वह केवल पूरी एकाग्रता से ही दिखती है। नासा के अनुसार उसे देखने का सबसे आसान महीना जून है; तब M83 शाम को आकाश में अच्छी स्थिति में होती है। लेकिन इस छवि वाली ठंडी गैस न आँखों से दिखती है, न किसी प्रकाशीय दूरबीन से: वह मिलीमीटर तरंगें छोड़ती है, जिन्हें केवल अल्मा जैसी रेडियो दूरबीनें दर्ज कर सकती हैं।
स्रोत और लाइसेंस
- अल्मा वेधशाला, A swirling galaxy (5 अक्टूबर 2026) — छवि और उसका विवरण (ठंडी गैस के अणुओं से आने वाला प्रकाश, तारों के बनने का कच्चा माल), 1.5 करोड़ प्रकाश वर्ष, M83 का आकाशगंगा से मिलता-जुलता होना, लगभग सामने से दृश्य। छवि का लाइसेंस CC BY 4.0, देखें https://www.almaobservatory.org/en/copyright-notice/ . https://www.almaobservatory.org/en/audiences/a-swirling-galaxy/
- ईएसओ सप्ताह का चित्र potw2640a (5 अक्टूबर 2026) — उसी छवि का मूल प्रकाशन, शोधपत्र के लिंक और दृश्य प्रकाश में तुलना के साथ। https://www.eso.org/public/images/potw2640a/
- Koda, Egusa, Hirota और अन्य, The Astrophysical Journal 986, 29 (2025), Dynamically Driven Evolution of Molecular Gas in the Barred Spiral Galaxy M83 Traced by CO J = 2–1/1–0 Line Ratio Variations — CO 2–1/1–0 रेखा-अनुपात का मानचित्र, 46 पारसेक विभेदन पर; भुजाओं के बीच अनुपात कम, दंड और भुजाओं में ऊँचा (घनत्व या तापमान लगभग 2–3 गुना ज़्यादा), उन भुजा-हिस्सों में भी जहाँ तारे नहीं बन रहे, H II क्षेत्रों के पास और ऊँचा; तारों का प्रभाव स्थानीय; गैस की अवस्था गैलेक्सी की संरचना और घूर्णन से तय; दंडीय सर्पिल गैलेक्सियों में संभवतः आम। https://doi.org/10.3847/1538-4357/add1dc
- नासा, हबल मेसियर सूची, Messier 83 — जलसर्प (हाइड्रा) तारामंडल, कांतिमान 7.5, सबसे चमकीली सर्पिल गैलेक्सियों में से एक, द्विनेत्री दूरबीन से दिखती है, जून में देखना सबसे आसान। https://science.nasa.gov/mission/hubble/science/explore-the-night-sky/hubble-messier-catalog/messier-83/
- SIMBAD (CDS), M 83 — स्थिति: विषुवांश 13 घंटे 37 मिनट 00.9 सेकंड, दिक्पात −29° 51′ 57″ (J2000), V = 7.52। https://simbad.cds.unistra.fr/simbad/sim-id?Ident=M83
- JPL Horizons — अक्टूबर 2026 से जुलाई 2027 तक की तारीख़ों पर सूर्य की स्थिति, जिससे यह निकाला गया कि M83 कब देखी जा सकती है। https://ssd.jpl.nasa.gov/horizons/
- SEDS मेसियर डेटाबेस, Messier 83 — चार्ल्स मेसियर ने 17 फ़रवरी 1781 को पेरिस में M83 को अपनी सूची में दर्ज किया और लिखा कि उसे “केवल पूरी एकाग्रता से” देखा जा सकता है; उत्तरी गोलार्ध के मध्य अक्षांशों से सबसे कठिन मेसियर पिंडों में से एक। http://www.messier.seds.org/m/m083.html



