पूरी तरह ड्यूटीरियमयुक्त मेथेनॉल अंतरिक्ष में पहली बार मिला
प्रकाशित · अपडेट:

चिली में रेडियो एंटीनाओं के विशाल समूह अल्मा (ALMA, Atacama Large Millimeter/submillimeter Array) की मदद से खगोलविदों ने ऐसा मेथेनॉल खोजा है जिसमें हर हाइड्रोजन परमाणु की जगह ड्यूटीरियम है। अंतरतारकीय अंतरिक्ष में मेथेनॉल के इस रूप की यह पहली पक्की पहचान है। यह अणु, CD₃OD, ययाति (पर्सियस) के आण्विक बादल में युवा प्राक्तारे IRAS 4A2 के चारों ओर मौजूद है, और वहाँ उसकी मात्रा इतनी ज़्यादा है कि आज के रासायनिक मॉडल उसे समझा नहीं पाते।
यह मेथेनॉल भारी क्यों है
मेथेनॉल (CH₃OH) सबसे सरल ऐल्कोहॉल है। उसमें एक कार्बन परमाणु से तीन हाइड्रोजन परमाणु जुड़े होते हैं, और यही कार्बन एक ऑक्सीजन परमाणु से जुड़ा होता है, जिस पर चौथा हाइड्रोजन लगा होता है। ड्यूटीरियम ऐसा हाइड्रोजन है जिसके नाभिक में प्रोटॉन के साथ एक न्यूट्रॉन भी होता है। इसलिए ड्यूटीरियम परमाणु का द्रव्यमान साधारण हाइड्रोजन परमाणु का दोगुना होता है, फिर भी वह ठीक वैसे ही अणु बनाता है। किसी अणु के जो रूप केवल अपने समस्थानिकों में एक-दूसरे से अलग होते हैं, उन्हें समस्थानिक-रूप (आइसोटोपोलॉग) कहा जाता है।
मेथेनॉल के चार ऐसे रूप पहले से ज्ञात थे जिनमें केवल कुछ हाइड्रोजन परमाणुओं की जगह ड्यूटीरियम है: उनमें एक, दो या तीन ड्यूटीरियम परमाणु होते हैं (अकेला ड्यूटीरियम कार्बन से भी जुड़ा हो सकता है और ऑक्सीजन से भी)। पहले के अध्ययनों में पूरी तरह ड्यूटीरियमयुक्त रूप के केवल अनिश्चित संकेत मिले थे। अब मैक्स प्लांक रेडियो खगोलविज्ञान संस्थान के आर्नो बेलोश के नेतृत्व में एक टीम ने CD₃OD की पहली पक्की पहचान दर्ज की है। अंतरतारकीय अंतरिक्ष में मिला यह पहला अणु है जिसमें चार ड्यूटीरियम परमाणु हैं।
चौंकाने वाली बात इसकी मात्रा है। हमारी आकाशगंगा में हर 1,00,000 हाइड्रोजन परमाणुओं पर ड्यूटीरियम के केवल लगभग 1.6 परमाणु हैं। अगर ड्यूटीरियम महज़ संयोग से बँटा होता, तो साधारण मेथेनॉल के 10¹⁹ (एक के बाद उन्नीस शून्य) अणुओं में पूरी तरह ड्यूटीरियमयुक्त अणु औसतन एक से भी कम होता। लेकिन टीम के माप के अनुसार, IRAS 4A2 के आसपास साधारण मेथेनॉल के हर 10,000 अणुओं पर लगभग चार CD₃OD अणु हैं।
जिस अणु को देखा नहीं जा सकता, उसे अल्मा कैसे पहचानता है
गर्म गैस में अणु घूमते रहते हैं, लेकिन केवल कुछ तय दरों पर। जब किसी अणु के घूमने की दर इनमें से एक दर से घटकर अगली धीमी दर पर आती है, तो वह एक बिल्कुल निश्चित आवृत्ति की रेडियो तरंग छोड़ता है। भारी परमाणु अणु के घूमने का ढंग बदल देते हैं, इसलिए हर समस्थानिक-रूप की आवृत्तियों का अपना अलग समूह होता है। उँगलियों के निशान की तरह यह समूह उस अणु की पहचान है, और इसे पहले प्रयोगशाला में मापना पड़ता है। CD₃OD के लिए यह माप 2023 में प्रकाशित हुआ।
ये अवलोकन अल्मा के एक बड़े कार्यक्रम COMPASS में किए गए। इसमें सूर्य जैसे 11 युवा प्राक्तारों का, यानी ऐसे तारों का जो अभी बन ही रहे हैं, 279.0 से 311.7 GHz तक की आवृत्तियों पर सर्वेक्षण किया गया (तरंगदैर्घ्य लगभग एक मिलीमीटर)। अल्मा हर प्राक्तारे के चारों ओर लगभग 100 खगोलीय इकाई (पृथ्वी और सूर्य के बीच की दूरी का 100 गुना) के भीतर की बारीकियाँ देख पाता है; यह किसी ग्रह-तंत्र जितना बड़ा क्षेत्र है। IRAS 4A2 की दिशा में CD₃OD की दस स्पेक्ट्रम रेखाएँ साफ़ और प्रबल दिखीं, और दूसरे अणुओं की रेखाओं से उनमें कोई ख़ास मिलावट नहीं थी। इसीलिए यह पहचान पक्की मानी जा रही है।
COMPASS के एक दूसरे अध्ययन में 11 में से 7 प्राक्तारों के पास मेथेनॉल की 302.9 GHz वाली एक रेखा मिली, जिसे वहाँ की गैस ख़ुद उसी तरह प्रवर्धित करती है जैसे लेज़र में प्रकाश प्रवर्धित होता है। ऐसे प्राकृतिक प्रवर्धक को मेसर कहते हैं। इन सात में से छह प्राक्तारे विकास की सबसे शुरुआती अवस्था में हैं, जिसे वर्ग 0 कहा जाता है; सातवें के पास का मेसर शायद ज़्यादा द्रव्यमान वाले एक पड़ोसी प्राक्तारे से बाहर बहती गैस की धारा के कारण बन रहा है।
ग्रहों और धूमकेतुओं के लिए यह रसायन क्यों मायने रखता है
मेथेनॉल धूल के कणों पर जमी बर्फ़ की परतों में बनता है। प्राक्तारा बनने से पहले की ठंडी अवस्था में हाइड्रोजन परमाणु जमी हुई कार्बन मोनोक्साइड से एक-एक करके जुड़ते जाते हैं। इतने कम तापमान पर ड्यूटीरियम का अतिरिक्त द्रव्यमान कुछ अभिक्रियाओं का पलड़ा ड्यूटीरियम के पक्ष में झुका देता है, इसलिए अणुओं में ड्यूटीरियम ब्रह्मांड में उसके औसत बाहुल्य से कहीं ज़्यादा जमा हो जाता है। इस तरह मेथेनॉल में ड्यूटीरियम की मात्रा से यह पता चलता है कि बर्फ़ किन हालात में बनी थी। जब युवा तारा अपने आसपास के क्षेत्र को गर्म करता है, तो यह बर्फ़ गैस बन जाती है — IRAS 4A2 के आसपास इस गैस का तापमान लगभग 200 केल्विन (−73 °C) है — और तब अल्मा उसमें मौजूद मेथेनॉल को माप पाता है।
इस रसायन के मॉडल अवलोकनों से मेल नहीं खाते: दो या तीन ड्यूटीरियम परमाणुओं वाले रूपों की जितनी मात्रा देखी गई है, मॉडल उससे दस से सौ गुना कम मात्रा का अनुमान लगाते हैं, और CD₃OD के मामले में यह अंतर और बढ़ जाता है। लेखकों का सुझाव है कि मॉडलों में कोई अहम घटक छूट रहा है।
धूमकेतु इस रसायन को हमारे सौर मंडल से जोड़ते हैं। अल्मा ने एक और युवा तंत्र, IRAS 16293-2422, का भी अवलोकन किया है। जब इन अवलोकनों की तुलना धूमकेतु 67P/चुर्युमोव-गेरासिमेंको पर रोसेटा यान के मापों से की गई, तो कई अणुओं की सापेक्ष मात्राएँ आपस में मेल खाती दिखीं: जो अणु एक जगह ज़्यादा था, वह आम तौर पर दूसरी जगह भी ज़्यादा था, हालाँकि आँकड़ों में कुछ बिखराव था। इससे लगता है कि धूमकेतुओं और ग्रहों के निर्माण में काम आने वाली बर्फ़ का कुछ हिस्सा उसी अवस्था से विरासत में मिला है जिसमें IRAS 4A2 आज है।
कहाँ देखें, और क्या दिख सकता है
IRAS 4A2 ययाति (पर्सियस) तारामंडल के युवा तारागुच्छ NGC 1333 के दक्षिणी किनारे पर है। यह तारागुच्छ एक परावर्ती नीहारिका में लिपटा है, यानी ऐसी धूल में जिसे पास के तारे रोशन करते हैं। IRAS 4A2 का विषुवांश 3 घंटे 29 मिनट और दिक्पात +31° 14′ है, और वह हमसे लगभग 950 प्रकाश वर्ष (290 पारसेक) दूर है। नवंबर के मध्य में यह तारागुच्छ आकाश में सूर्य के ठीक विपरीत होता है और रात के बीच में सबसे ऊँचा होता है; दिसंबर से फ़रवरी तक यह शाम को आसानी से दिखता है। लगभग 59° दक्षिणी अक्षांश से आगे दक्षिण में यह कभी क्षितिज के ऊपर आता ही नहीं, और 35° दक्षिणी अक्षांश से यह उत्तरी क्षितिज से अधिक से अधिक लगभग 24° ऊपर तक पहुँचता है।
प्राक्तारा ख़ुद शौक़िया खगोलविदों की दूरबीनों से नहीं दिखता, क्योंकि वह उसी गैस और धूल में दबा है जिससे वह बन रहा है; उसका मेथेनॉल केवल मिलीमीटर तरंगों के स्पेक्ट्रम में दिखाई देता है। ऐसा नहीं लगता कि आसपास की नीहारिका की दृश्य चमक का कोई भरोसेमंद माप अब तक प्रकाशित हुआ है।
स्रोत और लाइसेंस
- Belloche, Spezzano, Coutens और अन्य, Astronomy & Astrophysics 714, A55 (2026), COMPASS VII. First interstellar detection of fully deuterated methanol — IRAS4A2 की दिशा में CD₃OD की पहली ठोस अंतरतारकीय पहचान, चार ड्यूटीरियम परमाणुओं वाला पहला अंतरतारकीय अणु, पहले पहचाने जा चुके ड्यूटीरियमयुक्त समस्थानिक-रूप, CD₃OD की दस साफ़ पहचानी गई रेखाएँ (उनमें से दो में आंशिक मिलावट, खंड 3.2), सर्वेक्षण 279.0–311.7 GHz, दूरी 290 pc, घूर्णन तापमान लगभग 200 K, CD₃OD/CH₃OH लगभग 4 × 10⁻⁴, आकाशगंगा में D/H लगभग 1.6 × 10⁻⁵, कणों की बर्फ़ में CO के हाइड्रोजनीकरण से मेथेनॉल का बनना, मॉडलों के अनुमान दस से सौ गुना कम, कोई छूटी हुई प्रक्रिया, स्पेक्ट्रोस्कोपी CDMS से (Ilyushin और अन्य 2023)। मुक्त पहुँच, CC BY 4.0। https://doi.org/10.1051/0004-6361/202659642 (arXiv: https://arxiv.org/abs/2610.07279)
- अल्मा प्रेस विज्ञप्ति, 7 अक्टूबर 2026 — बड़ा कार्यक्रम COMPASS, सूर्य जैसे 11 युवा तारे, 100 घंटे से ज़्यादा का अवलोकन और A&A में सात शोधपत्र। https://www.almaobservatory.org/en/press-releases/cosmic-cocktail-alma-reveals-exotic-methanol-around-young-stars/
- मैक्स प्लांक रेडियो खगोलविज्ञान संस्थान की प्रेस विज्ञप्ति, 7 अक्टूबर 2026 (जर्मन में) — बर्फ़ीले कणों पर बड़े अणुओं के बनने की शुरुआत के रूप में मेथेनॉल, तारे के अपने आसपास के क्षेत्र को गर्म करने पर गैस में मुक्त होना, अज्ञात रेखाएँ जो शायद CH₂DOD और CHD₂OD की हैं, प्रयोगशाला में काम जारी। https://www.mpifr-bonn.mpg.de/pressemeldungen/2026/erster-nachweis-von-schwerem-methanol-im-weltraum?c=8727
- Jeong, Lee, Jørgensen और अन्य, Astronomy & Astrophysics 714, A54 (2026), COMPASS VI — 302.913 GHz पर वर्ग I का मेथेनॉल मेसर, 11 में से 7 स्रोतों में; HOPS 108 का मेसर शायद मध्यम द्रव्यमान वाले प्राक्तारे HOPS 370 की बाहर बहती गैस-धारा से; उसे छोड़कर कम द्रव्यमान वाले 10 में से 6 प्राक्तारे, सभी वर्ग 0 के। https://doi.org/10.1051/0004-6361/202558734
- Jørgensen, Coutens, Drozdovskaya और अन्य, Astronomy & Astrophysics 714, A49 (2026), COMPASS I. Overview — रेखाओं से भरे स्पेक्ट्रम वाले वर्ग 0 और वर्ग I के 11 सौर-प्रकार के प्राक्तारे, 279.0–311.7 GHz, हर स्रोत के चारों ओर भीतरी लगभग 100 खगोलीय इकाई। https://doi.org/10.1051/0004-6361/202558725
- Drozdovskaya और अन्य, Monthly Notices of the Royal Astronomical Society 490, 50–79 (2019) — प्राक्तारे IRAS 16293-2422 B में अणुओं की सापेक्ष मात्राएँ धूमकेतु 67P में रोसेटा द्वारा मापी गई मात्राओं से मेल खाती हैं; धूमकेतुओं के वाष्पशील पदार्थ आंशिक रूप से विरासत में मिले। https://doi.org/10.1093/mnras/stz2430 (arXiv: https://arxiv.org/abs/1908.11290)
- SIMBAD, [JCC87] IRAS 4A2 और NGC 1333 — IRAS 4A2: विषुवांश 03 घंटे 29 मिनट 10.4 सेकंड, दिक्पात +31° 13′ 32″ (ICRS); NGC 1333 का केंद्र: विषुवांश 03 घंटे 29 मिनट 11.3 सेकंड, दिक्पात +31° 18′ 36″, आकार 8′। https://simbad.cds.unistra.fr/simbad/sim-id?Ident=%5BJCC87%5D+IRAS+4A2



